मोबाइल के जमाना संगवारी । लाइका सियान ला होगे बीमारी
!! छत्तीसगढ़ी मा मोबाइल ऊपर कविता !!
“जय हो तोर नेट”
मोबाईल के जमाना हे,
चलत हे भारी नेट!
एकर चक्कर मा भात घलो,
नइ खवावय भर पेट!
आठोकाल बारो महीना,
आषाण सावन जेठ!
उठत बईठत रेंगत दउड़त,
घंसत घंसत कोलगेट!
नई छोड़न मोबाइल ला,
भले डिपटी मा हो जय लेट!
सब झन लगे हे मोबाईल मा,
गरीब होवय चाहे सेठ!
डोकरा बबा घलो हाथ उठाके,
खोजथे मोबाईल मा नेट!
कभू चढंहत हे अटरिया ता,
कभू चढ़हत हे गेट!
एकर चक्कर मा ले बर पडगे,
मँहगा वाला हेंडसेट!
जय हो तोर नेट!
जय हो तोर नेट!
।। कविता लेखन ।।
सुमीत साहू
ग्राम घिवरा, पोस्ट कोसरंगी
जिला रायपुर छत्तीसगढ़