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Showing posts from November 25, 2021

भागवत कथा सुनने पहुंचे प्रदेश के मुखिया बघेल, पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की कामना

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राजकुमार बंजारे/केशव पाल-तिल्दा नेवरा। धार्मिक पर्यटन स्थल माँ बंजारी धाम खपरी मढ़ी में इन दिनों धरसींवा विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा के सपरिवार द्वारा नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कथावाचक भागवत भूषण आचार्य पंडित चंदन प्रसाद शर्मा पथरी (सिलयारी) वाले द्वारा ब्यास पीठ से रसिक श्रोताओं को भागवत कथा का रसपान कराया जा रहा हैं। कथा के चौंथे दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बतौर अतिथि कार्यक्रम में सम्मलित हुए। मुख्यमंत्री सर्वप्रथम तिल्दा-नेवरा से लगे बोइरझिटी गांव में श्रद्वांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए तत्पश्चात भागवत कथा स्थल बंजारी धाम पहुंचे। इस दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा बाजे-गाजे के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल ने माँ बंजारी और भागवत भगवान की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए कामना किए। मुख्यमंत्री ने कथावाचक पंडित चंदन प्रसाद शर्मा से आशीर्वाद ग्रहण कर कथा का श्रवण भी किए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम में आमंत...

किसान दुखी होगे समय के परिवर्तन ल देख के.. सुमीत साहू पंक्ति

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किसान के अंतस के पीरा कविता  ज़िंदगी कट रही है खुरपी और कुदाल से, भूखा पेट तक खेती से अब भरता नहीं .! महज हम नाम के जमीनदार है किसान है, घर का खर्च तक खेती से अब चलता नहीं! जन्म मिट्टी में लेकर, दफन होते थाल में ! भूखे मरते है हम बाढ़ में अकाल में! अंधे -बहरे इस सरकार को हम देख कर, उम्र भर गूँगे बन कर घुटते है तंगहाल में...! जवानी झुलस रही है,कोल्हू में पीस कर, चुल्लू भर उम्मीदें खेती से अब मिलता नहीं.! महज हम नाम के जमींदार है किसान है, घर का खर्च तक खेती से अब चलता नहीं .! महंगाई डस रही है, गरीबों को ढूँढ कर, और वेतन बढ रहे हैं, आसमां को चूम कर .! मगर परवाह किसको ??? निम्न स्तरीय़ किसान का, दबेंगे ब्याज में ये प्याज को भी सूंघ कर! ये बढ़ते दाम चीनी कडूवा डीजल उर्वरक के, उठाया कर्ज हमने, रक्त के हर एक बूँद पर! फिर भी कर्ज ये हटता नहीं घटता नहीं, और आमदनी तो तिल भर बढ़ती नहीं...! घुट रहा है दम रिश्तों के भीड़ में, और मुश्किलों का बादल ये छंटता नहीं...! महज हम नाम के जमीन्दार है किसान है, घर का खर्च तक खेती से अब चलता नहीं!!