आषाढ़ लगती पहली बरसात पर एक कविता।
नूतन मन वर्षा हरषाई।
पाँव पहन चपला के नूपुर,
मेघों ने फिर रोर मचाई।
आषाढ़ की पहली वर्षा,
नदी ताल यौवन धर लाई।
गगन धरा अनुबंध हो गए,
नीरद मधुशाला छलकाई।
आषाढ़ की पहली वर्षा,
कामदेव ने ली अंगड़ाई।
कुमुदिनी कुसुमित तडा़ग में,
युगल क्रौंच धरते तरूणाई।
आषाढ़ की पहली वर्षा,
देख मेघ वसुधा ललचाई।
अम्बर से मुस्काती बूँदें,
आज झील से मिलने आईं।
आषाढ़ की पहली वर्षा,
कजरारे मेघा संग छाई।
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