मोहरेंगा में एक किसान जमीन विवाद के चलते आत्महत्या कर लिया है, लेकिन मामला में कुछ और नजर आ रही है
![]() |
| मृतक सरजू यादव |
खरोरा। राजधानी से सटे खरोरा के समीपस्थ ग्राम मोहरेंगा में एक किसान ने जमीन विवाद में न्याय नहीं मिलने के कारण आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में खरोरा नायब तहसीलदार, मोहरेंगा ग्राम कोटवार सहित दो अन्य लोगों से परेशान होकर आत्महत्या करने का जिक्र है। साथ ही आरोपियों को सजा दिलाने की मांग की गई है। वही इस आत्महत्या के प्रकरण में कई तरह के सन्देहों को जन्म दिया है।
![]() |
| सूसाइड नोट का पहली कॉपी |
![]() |
| सूसाइड नोट का दूसरा कॉपी जिसका हैंडराइटिंग अलग अलग है। |
मिली जानकारी के अनुसार खरोरा तहसील के मोहरेंगा गांव में बीते सुबह किसान सरजू यादव ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली जिसकी सूचना खरोरा पुलिस को दी गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
लेकिन इस आत्महत्या के पीछे कुछ और कहानी भी नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसान की मौत कई प्रश्न खड़ा कर रही है,
मोहरेंगा की घटना आत्महत्या है कि हत्या है कि अधिकारी को फसाने साजिश है,मामले में कई सवाल उत्पन्न हो रहे है जो सवालों के घेरे में है।
जिसमे पहला सन्देह यह खड़ा हो रहा है, कि मृतक एक वर्ष पहले के प्रकरण पर आज आत्महत्या क्यों किया यदि वह प्रताड़ित था तो उसने ऐसा कदम पूर्व में ही उठा लेता?
वही दूसरा प्रश्न यह उठ रहा है कि मृतक सरजू राम जब स्वेच्छा से अपना कब्जा छोड़ा तो उसे एक साल बाद सुसाइड करना क्यों पड़ा?
तीसरा प्रश्न यह उठ रहा है कि मृतक सरजू राम का हस्ताक्षर न्यायालय के आर्डर शीट मे तथा सुसाइड नोट मे अलग अलग क्यों है?
![]() |
| सूसाइड लेटर का हस्ता. |
![]() |
| आर्डर शिट का हस्ता.जो अलग अलग है। |
वही चौथा सवाल यह उठ रहा है कि मृतक सरजू राम के घर में मृत्यु के 1 दिन पूर्व किसी बात पर पारिवारिक वाद विवाद हुआ परिवारिक वाद-विवाद मृत्यु का कारण तो नहीं है?
पांचवा सवाल यह उठ रहा है कि मृतक सरजू राम अपने नातिन का इलाज हैदराबाद में कराने के लिए 15 लाख रुपए का इंतजाम करना चाहता था जिसके लिए वह खेत बेचना चाहता था खेत बेचने के नाम पर पारिवारिक वाद-विवाद तो नहीं हुआ क्या यह आत्महत्या का कारण तो नहीं है?
छठवा सवाल यह उठ रहा है की मृतक सुसाइड करने के दिन नशे में था।और पारिवारिक वाद विवाद भी हुआ क्या यह हत्या भी हो सकती है?
वही सातवा प्रश्न यह उठ रहा है कि सुसाइड नोट के पहले पेज में हस्ताक्षर है किंतु दूसरे पेज में हस्ताक्षर क्यों नहीं, जबकि या तो प्रथम पेज में हस्ताक्षर नही होना था सोसाइड नोट के अंत में हस्ताक्षर होना चहिये था, या तो पहले व दूसरे दोनों पेज में हस्ताक्षर होना चाहिए था लेकिन पहले पेज में हस्ताक्षर व दूसरे में नही यह कई तरह के सवाल खड़ा कर रहा है?
और आठवा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस घटना को अंजाम देने के बाद अधिकारियों को फंसाने की साजिश की जा रही है?
अब इस आत्महत्या के मामले पर खरोरा पुलिस व जांच टीम को इन पहलुओं पर अवश्य जांच करनी चाहिए, जिससे इस घटना क्रम का खुलासा हो सके। क्या यह आत्महत्या है यदि है तो किन कारणों से सरजू ने ऐसा कदम उठाया और यदि हत्या है तो वे कौन लोग है जो इस हत्या को आत्महत्या का रूप बना कर अधिकारियों को फंसाने के प्रयास किया जा रहा है।
इस मामले में नायब तहसीदार के ऊपर दंडाधिकारी जांच लगाये गए है। अधिकारी इस मामले की जांच की जा रही है।
मृतक सरजू राम यादव के तीनो पुत्रो ने मिडिया से चर्चा करते हुए बताया की ग्राम मोहरेंगा के कोटवार तोरन दास मानिकपुरी ग्रामीण तुलु साहू -भुवन वर्मा और तहसीलदार पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है।
:::::खरोरा के थाना प्रभारी ने बताया की मृतक के पास सोसाइडल नोट मिला है, जिसमे उनके द्वारा कुछ लोगो का नाम लिखा गया है। प्रारम्भिक जाँच में जमीन विवाद का बात सामने आया है, की मृतक सीमांकन को लेकर दुखी था इस आधार पर जाँच जारी है।
नायब तहसीलदार नन्द किशोर सिन्हा ने कहा है की किसान के इस तरह की मृत्यु से मैं भी व्यथित हु।
किसान के मौत का खेद है।
आर्डर के एक साल बाद उनके द्वारा ये कदम उठाया जाना समझ से परे है।
मेरे द्वारा विधिवत सहिता के प्रावधानों के अनुसार सीमांकन करवाकर उनको सुनवाई के पर्याप्त अवसर दिया गया और सभी तथ्य स्पस्ट होने पर स्वयं उनके द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से कब्ज़ा कोटवार को सौपा गया था। यदि असंतुष्ट था तो अपील मे जा सकता था।
मृतक मुझे मेरे नाम से अच्छी तरह से जानते हुए जायसवाल का नाम लिखा है,जो सुसाइड नोट को संदेहास्पद बनाता है।




